Significance of Jageshwar

Know More About Jageshwar


jageshwar-astro-picभगवान शहर की महिमा अलौकिक हैं इनको “आशुतोष” भी कहते हैं | आशु तोष यति इति आशुतोष जो उपासना के माध्यम से शीध्र ही संतुष्ट हो जाते हैं उनका नाम आशुतोष हैं | भगवान शंकर द्वादश ज्योतिष लिंगों में विख्यात हैं | आदि शंकराचार्य जी ने भारत में द्वादश ज्योतिष लिंग की स्थापना एवं प्रतिष्ठा की | इनमें अल्मोड़ा के उत्तराखंड जिले के 28 कि. मी. दूरी पर उत्तर दिशा में जागेश्वर नाम का एक प्रसिद्ध शंकर जी का मंदिर हैं जिसका उल्लेख “शिव पुराण में भी आता हैं ” वहाँ गँगा के समीप देवदारु वृक्षों से आच्छादित यह मंदिर एक अनुपम शांति का केंद्र हैं | यहाँ गंगा का जल अत्यंत ठंडा है दूसरी ओर उष्ण जल का एक जलाशय भी हैं जहाँ शीत काल में उष्णोदक से स्नान भी करते हैं | अंग्रेजों के जमाने में इस मंदिर में गोरखा सैनिकों ने हमला भी किया था पर शंकर जी की कृपा से ततयों के झुंड से आहत हुए सैनिक मंदिर में प्रवेश ही नहीं कर सके महाराज आनंद सिंह के संरक्षण में यह मंदिर विशेष आराधना का केंद्र रहा | इस मंदिर की ख्याति एवं प्रतिष्ठा से अल्मोड़ा जनपद के ही नहीं अन्य प्रान्तों एवं जिलों से भी लोग पूजा अर्चना हेतु जाया करते हैं |

जो पुरातत्व विभाग के संरक्षण में चल रही हैं | जागेश्वर मंदिर के अनन्य भक्त श्री नन्द किशोर तिवारी जी डी. एफ. ओ. भी रहे हैं तथा डाक घर विभाग के अधीक्षक रह चुके | परम पूज्य मेरे दादा जी पंडित मोतीराम पाण्डेय भी जागेश्वर के अनन्य भक्त थे | राजा साहेब आनंद सिंह जी के दिवंगत के बाद उनके द्वारा स्थापित संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य पूज्य मोतीराम पाण्डेय जी थे | विद्यालय के समाप्ति के बाद दादा जी को स्वप्न में यह सन्देश मिला तुम रोजी रोटी के लिए परेशान मत होना मेरे आधार से तुम्हारी रोजी रोटी का साधन बनेगा | पूज्य दादा जी की अखंड तपस्या में संतान प्राप्ति का योग जागेश्वर जी की कृपा से हुआ जो आज फलता फूलता विकसित हो रहा हैं | वंशीधर पाण्डेय जो मुरादाबाद के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं मुरादाबाद इंटर कालेज के सेवा निवृत अध्यापक जिनको 2005 मुरादाबाद विद्वान परिषद ने सम्मानित किया | उन्ही के कनिष्ठ पुत्र गोविन्द पाण्डेय विगत कुछ वर्षो से जागेश्वर ज्योतिष केंद्र को चला रहे है और ज्योतिष के कार्य क्षेत्र में अनुसन्धान कर रहे हैं |

जागेश्वर जी हमारे इष्ट देवता हैं उन्हीं के आशीर्वाद से प्रेरणा के स्रोत उपलब्ध होते रहते हैं | गोविन्द पाण्डेय एम. ए. अर्थशास्त्र से, एम. बी. ए. पंजाब यूनिवर्सिटी से, चेन्नई से अखिल भारतीय ज्योतिष परिषद की शिक्षा उत्तीण कर पूर्वजों की धरोहर को विकसित करने में आधुनिक रूप से समझाने का प्रयास कर रहे हैं | भविष्य में इस शिक्षा का लोप ना हो पाए इसी कारण से उन्होंने ज्योतिष के संरक्षण के लिए अन्य आजीविका का साधन नहीं बनाया | संघर्ष की इस घडी में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिले, फिर भी उन्होंने केवल ज्योतिष के प्रति ही नहीं वास्तु शास्त्र का भी विशेष अध्ययन किया | चिकित्सकीय ज्योतिष का भी मनन एवं अध्ययन किया जिससे चिकित्सा के क्षेत्र में भी ज्योतिष का प्रभाव प्रभावित हो रहा हैं | आधुनिक समय में नौकरी पेशा एवं ऊपरी आमदनी के परिपेक्ष्य में यह कार्यक्षेत्र गौड़ एवं उपेक्षा भाव वाले विषय रूप में महत्वहीन समझा जा रहा हैं | इसकी उपयोगिता को बढ़ाने के लिए गोविन्द पाण्डेय जी के दोबारा अथक प्रयास के माध्यम से www.JageshwarAstro.com की शुरुआत की गई है |

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